अशोकाष्टमी 2018

अशोकाष्टमी 2018 – अशोकाष्टमी का महत्व और कथा

अशोकाष्टमी 2018 का त्यौहार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन अशोक वृक्ष के पूजन का महात्म्य बताया गया है।

अशोकाष्टमी 2018 – अशोकाष्टमी की कथा

इसके सम्बन्ध में एक काफी पुरानी कथा कही जाती है कि रावण की लंका में अशोक वाटिका में प्रवास करने वाली सीता को इसी दिन हनुमान (हनुमान जी की संपूर्ण कहानियाँ पढ़ें) से राम की अंगूठी और सन्देश प्राप्त हुआ था। इस दिन अशोक वृक्ष की कलिकाओं का रस निकालकर पीना चाहिए। इससे शरीर के रोगों का समूल नाश हो जाता है।

अशोक वाटिका का वर्णन तुलसीदास जी द्वारा रचित सुंदरकांड में किया गया है। एक दोहे के अनुसार –

नाथ एक आवा कपि भारी।
तेहिं असोक बाटिका उजारी॥
खाएसि फल अरु बिटप उपारे।
रच्छक मर्दि मर्दि महि डारे॥

अर्थात: हे नाथ! एक बड़ा भारी बंदर आया है। उसने अशोक वाटिका उजाड़ डाली। फल खाए, वृक्षों को उखाड़ डाला और रखवालों को मसल-मसलकर जमीन पर डाल दिया।

अशोकाष्टमी 2018 – अशोक वृक्ष का महत्व

अशोक वृक्ष को बहुत पवित्र माना जाता है। इसमें नारंगी और पीले रंग के फूल आते हैं जो बाद में लाल हो जाते हैं। इसकी सुगंध बहुत मनमोहक होती है और ये फूल गुच्छे में लगते हैं। ये आकर में बहुत बड़ा वृक्ष नहीं होता है। अब ये धीरे धीरे लुप्त हो रहा है। श्रीलंका और हिमालय पर अभी भी इसके वृक्ष पाए जाते हैं। इसकी कलिकाओं में औषधीय गुण होते हैं और काफी आयुर्वेदिक दवाइयों और उत्पादों में इसका उपयोग होता है।

अशोक वृक्ष के विषय में पढ़ें

अशोक के वृक्ष से सम्बंधित कुछ कहानियाँ हैं जैसे कि यक्षि नाम की एक पौराणिक पात्र हैं। बौद्ध मंदिर और कुछ हिन्दू मंदिरों में यक्षि की प्रतिमा होती है जिसमें दिखाया जाता है कि यक्षि अशोक वृक्ष के तने पर खड़ी हुई हैं और अपने एक हाथ से डाली पकडे हैं। इन्हे कृषि से सम्बंधित देवी माना जाता है।

एक अन्य कहानी भी है जिसमे अशोक के फूल को कामदेव से सम्बंधित बताया है। कामदेव के तरकस के वाणों में 5 प्रकार के पुष्प हैं और उनमें से एक अशोक का भी है। मोहक सम्मोहन के लिए कामदेव इसका उपयोग करते हैं।

चैत्र मास में एक त्यौहार आता है जिसे अशोकाष्टमी कहते हैं। उस त्यौहार में इस वृक्ष का बहुत अधिक महत्व होता है।

 

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