चैत्र पूर्णिमा

चैत्र पूर्णिमा 2018 – चैत्र पूर्णिमा की कहानी, विधि

चैत्र मास की पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा 2018 कहा जाता है। यह बहुत पवित्र मानी जाती है। वैसे तो प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि पवित्र मानी जाती है। चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम भी कहा जाता है।

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चैत्र पूर्णिमा 2018 कैसे मनायें

इस दिन स्त्री, पुरुष, बाल, वृद्ध पवित्र नदियों में स्नान कर अपने को पवित्र बनाते हैं। इस दिन घरों में स्त्रियाँ भगवान लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखती हैं और प्रभु सत्यनारायण की कथा सुनती हैं।

चैत्र पूर्णिमा 2018 की कहानी

चैत्र पूर्णिमा 2018 एक बहुत विशेष दिन होता है। आज के दिन चन्द्रमा को प्रसन्न किया जाता है। चूँकि ये हिन्दू नव वर्ष के बाद प्रथम पूर्णिमा होती है इसलिए इसका बहुत अधिक महत्व होता है। इसी दिन पवनपुत्र रामभक्त महाबली हनुमान जी को माता अंजनी ने जन्म दिया था। चैत्र पूर्णिमा को व्रत रखा जाता है। सुबह उठ कर सर्वप्रथम स्नान कर तैयार हो जाना चाहिए। फिर श्री हरी सत्यनारायण की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

इस दिन व्रती को प्रेम भाव रख कर प्रभु की सेवा करनी चाहिए। किसी के प्रति किसी प्रकार की निंदा ना रखें तथा अपने ज्ञान का दान करें। सभी को सत्यनारायण जी की महिमा का ज्ञान कराएं और प्रभु के विचारों की और उनके आदर्शों की चर्चा करें।

इस दिन तुलसी स्नान किया जाता है। अर्थात तुलसी के पात्र को जल में डालकर स्नान करते हैं। इसका महत्व केवल भक्ति और आध्यात्म तक ही सीमित नहीं है अपितु आयुर्वेद की दृष्टि से भी ये अत्यंत लाभकारी होता है।

रात्रि को चन्द्रमा को अर्क देना चाहिए और सौभाग्य की प्रार्थना करनी चाहिए। सुबह फिर स्नान करके किसी ब्राह्मण को एक कलश अन्न का दान करना चाहिए। इससे चंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल प्रदान करते हैं। चैत्र पूर्णिमा 2018 में 31 मार्च को है। पूरे विधिवत रूप से चैत्र पूर्णिमा का व्रत करें और प्रभु सत्यनारायण को प्रसन्न करें।

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