वैशाखी पूर्णिमा

वैशाखी पूर्णिमा 2018 – वैशाखी पूर्णिमा की व्रत विधि और कहानी

वैशाख माह की पूर्णिमा अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसे वैशाखी पूर्णिमा 2018 कहते हैं और इस दिन व्रत करने का बहुत महत्व है।

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वैशाखी पूर्णिमा 2018 व्रत विधि

वैशाखी पूर्णिमा 2018 का व्रत बहुत पावन होता है। इस दिन दान करने का बहुत महत्व है। लोग पवित्र नदियां जैसे गंगा, यमुना, गंगोत्री आदि में स्नान करके पाप मुक्त होते हैं। स्नान के समय सूर्य को अर्क दिया जाता है और प्रार्थना की जाती है कि परिवार के सभी सदस्यों को सुख और सफलता प्रदान हो।

वैशाखी पूर्णिमा को जल से भरा कलश भी दान किया जाता है। अर्थात जल और दान का इस दिन संगम है। कलश में जल भर कर दान करना केवल शुभ ही नहीं अपितु पुण्य का कार्य है क्योंकि जल का दान अत्यंत शुभ होता है। अन्य वस्तुओं का दान भी किया जाता है जैसे वस्त्र, मिठाइयाँ, सत्तू इत्यादि।

वैशाखी पूर्णिमा 2018 की कहानी

वैशाखी पूर्णिमा 2018 की कहानी कुछ इस प्रकार है –

सुदामा और कृष्ण बचपन के मित्र थे। कृष्णा द्वारकाधीश बने जबकि सुदामा दरिद्र रह गए। परन्तु उन्होंने कभी भी कृष्ण भक्ति नहीं छोड़ी। एक बार उनके पास सिर्फ एक चावल का दाना था और भिक्षा में कुछ नहीं मिला। उन्होंने उस चावल के दाने को खाया नहीं बल्कि उसे श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने अर्पित कर दिया। श्री कृष्ण सुदामा की इस भक्ति को देख कर गदगद हो गए।

एक बार सुदामा जी की पत्नी ने उन्हें श्री कृष्ण से मिलने के लिए कहा और बोला कि वो कृष्ण को अपनी हालत के विषय में बताएँगे तो कृष्ण अवश्य ही मदद करेंगे। सुदामा द्वारिका जाकर श्री कृष्ण से मिले। वहां कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक व्रत का विधान बताया। उन्होंने सोचा कि तुम्हारे चावल के एक दाने का मोल में पूरी शृष्टि तुम्हे सौंप कर ही चुका सकता हूँ। कृष्ण के मन की बात जानकार लक्ष्मी जी चिंतित हो गयीं और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। तब श्री कृष्ण ने कहा कि जो कोई वैशाखी पूर्णिमा 2018 का व्रत पूरी विधि के साथ करेगा, उसे धन धान्य की प्राप्ति होगी।

सुदामा की दरिद्रता समाप्त हो चुकी थी। वो अत्यंत ऐश्वर्यशाली हो गए थे। उनके पुण्य से उनके सभी नगर वासी भी ऐश्वर्य से परिपूर्ण हो गए।

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