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  • ४ - जामवंत के वचन हनुमान्‌ जी को भाए

    *चौपाई :*
    जामवंत के बचन सुहाए,
    सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
    तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई,
    सहि दुख कंद मूल फल खाई ॥1॥

    भावार्थ : जामवंत के सुंदर वचन सुनकर हनुमान्‌जी के हृदय को बहुत ही भाए। (वे बोले-) हे भाई! तुम लोग दुःख सहकर, कन्द-मूल-फल खाकर तब तक मेरी राह देखना ॥1॥

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Krishna Kutumb
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