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  • ६ - हनुमान जी का पर्वत में चढ़ना

    सिंधु तीर एक भूधर सुंदर,
    कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥
    बार-बार रघुबीर सँभारी,
    तरकेउ पवनतनय बल भारी ॥3॥

    समुद्र के तीर पर एक सुंदर पर्वत था। हनुमान्‌जी खेल से ही (अनायास ही) कूदकर उसके ऊपर जा चढ़े और बार-बार श्री रघुवीर का स्मरण करके अत्यंत बलवान्‌ हनुमान्‌ जी उस पर से बड़े वेग से उछले॥3॥

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