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  • १६- हनुमान जी का हर्षित होना

    दोहा :
    * राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
    आसिष देइ गई सो हरषि चलेउ हनुमान॥2॥

    भावार्थ : तुम श्री रामचंद्रजी का सब कार्य करोगे, क्योंकि तुम बल-बुद्धि के भंडार हो। यह आशीर्वाद देकर वह चली गई, तब हनुमान्‌जी हर्षित होकर चले॥2॥

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