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  • २२ - लंका वर्णन

    * अति उतंग जलनिधि चहुँ पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा॥6॥

    भावार्थ : वह अत्यंत ऊँचा है, उसके चारों ओर समुद्र है। सोने के परकोटे (चहारदीवारी) का परम प्रकाश हो रहा है॥6॥

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