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  • २३ - लंका वर्णन

    छंद :
    * कनक कोटि बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना।
    चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना॥
    गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथन्हि को गनै।
    बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै॥1॥

    भावार्थ : विचित्र मणियों से जड़ा हुआ सोने का परकोटा है, उसके अंदर बहुत से सुंदर-सुंदर घर हैं। चौराहे, बाजार, सुंदर मार्ग और गलियाँ हैं, सुंदर नगर बहुत प्रकार से सजा हुआ है। हाथी, घोड़े, खच्चरों के समूह तथा पैदल और रथों के समूहों को कौन गिन सकता है! अनेक रूपों के राक्षसों के दल हैं, उनकी अत्यंत बलवती सेना वर्णन करते नहीं बनती॥1॥

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Krishna Kutumb
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