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  • ३६ - हनुमान जी का और विभीषण संवाद

    हनुमान् -विभीषण संवाद

    दोहा :
    * रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।
    नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराई॥5॥

    भावार्थ : वह महल श्री रामजी के आयुध (धनुष-बाण) के चिह्नों से अंकित था, उसकी शोभा वर्णन नहीं की जा सकती। वहाँ नवीन-नवीन तुलसी के वृक्ष-समूहों को देखकर कपिराज श्री हनुमान्‌जी हर्षित हुए॥5॥

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