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  • ३७ - हनुमान जी का मन ही मन सोचना

    चौपाई :
    * लंका निसिचर निकर निवासा। इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा॥
    मन महुँ तरक करैं कपि लागा। तेहीं समय बिभीषनु जागा॥1॥

    भावार्थ : लंका तो राक्षसों के समूह का निवास स्थान है। यहाँ सज्जन (साधु पुरुष) का निवास कहाँ? हनुमान्‌जी मन में इस प्रकार तर्क करने लगे। उसी समय विभीषणजी जागे॥1॥

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Krishna Kutumb
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