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  • ३९- हनुमान जी का ब्राह्मण का रूप लेना

    * बिप्र रूप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषन उठि तहँ आए॥
    करि प्रनाम पूँछी कुसलाई। बिप्र कहहु निज कथा बुझाई॥3॥

    भावार्थ : ब्राह्मण का रूप धरकर हनुमान्‌जी ने उन्हें वचन सुनाए (पुकारा)। सुनते ही विभीषणजी उठकर वहाँ आए। प्रणाम करके कुशल पूछी (और कहा कि) हे ब्राह्मणदेव! अपनी कथा समझाकर कहिए॥3॥

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Krishna Kutumb
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