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  • ४१ - हनुमान जी का विभीषण से संवाद

    दोहा :
    * तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।
    सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम॥6॥

    भावार्थ : तब हनुमान्‌जी ने श्री रामचंद्रजी की सारी कथा कहकर अपना नाम बताया। सुनते ही दोनों के शरीर पुलकित हो गए और श्री रामजी के गुण समूहों का स्मरण करके दोनों के मन (प्रेम और आनंद में) मग्न हो गए॥6॥

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Krishna Kutumb
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