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  • ४२ - हनुमान जी का विभीषण से संवाद

    दोहा :
    * अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर।
    कीन्हीं कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर॥7॥

    भावार्थ : हे सखा! सुनिए, मैं ऐसा अधम हूँ, पर श्री रामचंद्रजी ने तो मुझ पर भी कृपा ही की है। भगवान्‌ के गुणों का स्मरण करके हनुमान्‌जी के दोनों नेत्रों में (प्रेमाश्रुओं का) जल भर आया॥7॥

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Krishna Kutumb
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