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  • ४२ - हनुमान जी का विभीषण से संवाद

    * पुनि सब कथा बिभीषन कही। जेहि बिधि जनकसुता तहँ रही॥
    तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता। देखी चहउँ जानकी माता॥2॥

    भावार्थ : फिर विभीषणजी ने, श्री जानकीजी जिस प्रकार वहाँ (लंका में) रहती थीं, वह सब कथा कही। तब हनुमान्‌जी ने कहा- हे भाई सुनो, मैं जानकी माता को देखता चाहता हूँ॥2॥

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Krishna Kutumb
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