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  • ५२ - हनुमान जी का वृक्ष के पत्तो में छिपना

    चौपाई :
    * तरु पल्लव महँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई॥
    तेहि अवसर रावनु तहँ आवा। संग नारि बहु किएँ बनावा॥1॥

    भावार्थ : हनुमान्‌जी वृक्ष के पत्तों में छिप रहे और विचार करने लगे कि हे भाई! क्या करूँ (इनका दुःख कैसे दूर करूँ)? उसी समय बहुत सी स्त्रियों को साथ लिए सज-धजकर रावण वहाँ आया॥1॥

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Krishna Kutumb
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