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  • ५६ - सीता माता का रावण से सवांद

    * सठ सूनें हरि आनेहि मोही। अधम निलज्ज लाज नहिं तोही॥5॥

    भावार्थ : रे पापी! तू मुझे सूने में हर लाया है। रे अधम! निर्लज्ज! तुझे लज्जा नहीं आती?॥5॥

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Krishna Kutumb
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