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  • ५९ - सीता माता का रावण से सवांद

    * स्याम सरोज दाम सम सुंदर। प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर॥
    सो भुज कंठ कि तव असि घोरा। सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा॥2॥

    भावार्थ : (सीताजी ने कहा-) हे दशग्रीव! प्रभु की भुजा जो श्याम कमल की माला के समान सुंदर और हाथी की सूँड के समान (पुष्ट तथा विशाल) है, या तो वह भुजा ही मेरे कंठ में पड़ेगी या तेरी भयानक तलवार ही। रे शठ! सुन, यही मेरा सच्चा प्रण है॥2॥

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Krishna Kutumb
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