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  • ६३ - रावण का वहां से जाना

    दोहा :
    * भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद।
    सीतहि त्रास देखावहिं धरहिं रूप बहु मंद॥10॥

    भावार्थ : (यों कहकर) रावण घर चला गया। यहाँ राक्षसियों के समूह बहुत से बुरे रूप धरकर सीताजी को भय दिखलाने लगे॥10॥

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