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  • ६४ - त्रिजटा राक्षशी के सपने में प्रभु श्री राम का आना

    चौपाई :
    * त्रिजटा नाम राच्छसी एका। राम चरन रति निपुन बिबेका॥
    सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना। सीतहि सेइ करहु हित अपना॥1॥

    भावार्थ : उनमें एक त्रिजटा नाम की राक्षसी थी। उसकी श्री रामचंद्रजी के चरणों में प्रीति थी और वह विवेक (ज्ञान) में निपुण थी। उसने सबों को बुलाकर अपना स्वप्न सुनाया और कहा- सीताजी की सेवा करके अपना कल्याण कर लो॥1॥

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    ६४ - त्रिजटा राक्षशी के सपने में प्रभु श्री राम का आना