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  • ६५ - त्रिजटा राक्षशी के सपने का वर्णन

    * सपनें बानर लंका जारी। जातुधान सेना सब मारी॥
    खर आरूढ़ नगन दससीसा। मुंडित सिर खंडित भुज बीसा॥2॥

    भावार्थ : स्वप्न (मैंने देखा कि) एक बंदर ने लंका जला दी। राक्षसों की सारी सेना मार डाली गई। रावण नंगा है और गदहे पर सवार है। उसके सिर मुँडे हुए हैं, बीसों भुजाएँ कटी हुई हैं॥2॥

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Krishna Kutumb
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