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  • ६८ - सीता जी का मन में सोचना

    श्री सीता-त्रिजटा संवाद

    दोहा :
    * जहँ तहँ गईं सकल तब सीता कर मन सोच।
    मास दिवस बीतें मोहि मारिहि निसिचर पोच॥11॥

    भावार्थ : तब (इसके बाद) वे सब जहाँ-तहाँ चली गईं। सीताजी मन में सोच करने लगीं कि एक महीना बीत जाने पर नीच राक्षस रावण मुझे मारेगा॥11॥

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