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  • ७५ - हनुमान जी का सीताजी के सामने अँगूठी डालना

    श्री सीता-हनुमान् संवाद

    सोरठा :
    * कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारि तब।
    जनु असोक अंगार दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ॥12॥

    भावार्थ:-तब हनुमान्‌जी ने हदय में विचार कर (सीताजी के सामने) अँगूठी डाल दी, मानो अशोक ने अंगारा दे दिया। (यह समझकर) सीताजी ने हर्षित होकर उठकर उसे हाथ में ले लिया॥12॥

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Krishna Kutumb
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