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  • ७६ -सीता जी का अँगूठी को देखना

    चौपाई :
    * तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर॥
    चकित चितव मुदरी पहिचानी। हरष बिषाद हृदयँ अकुलानी॥1॥

    भावार्थ:-तब उन्होंने राम-नाम से अंकित अत्यंत सुंदर एवं मनोहर अँगूठी देखी। अँगूठी को पहचानकर सीताजी आश्चर्यचकित होकर उसे देखने लगीं और हर्ष तथा विषाद से हृदय में अकुला उठीं॥1॥

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Krishna Kutumb
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