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  • १०१ - हनुमान जी का सीताजी से आशीर्वाद लेना

    चौपाई :
    * मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी॥
    आसिष दीन्हि राम प्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना॥1॥

    भावार्थ:-भक्ति, प्रताप, तेज और बल से सनी हुई हनुमान्‌जी की वाणी सुनकर सीताजी के मन में संतोष हुआ। उन्होंने श्री रामजी के प्रिय जानकर हनुमान्‌जी को आशीर्वाद दिया कि हे तात! तुम बल और शील के निधान होओ॥1॥

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