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  • १०३ - हनुमान जी ने सीताजी के चरणों में सिर झुकाया

    *बार बार नाएसि पद सीसा। बोला बचन जोरि कर कीसा॥
    अब कृतकृत्य भयउँ मैं माता। आसिष तव अमोघ बिख्याता॥3॥

    भावार्थ:-हनुमान्‌जी ने बार-बार सीताजी के चरणों में सिर नवाया और फिर हाथ जोड़कर कहा- हे माता! अब मैं कृतार्थ हो गया। आपका आशीर्वाद अमोघ (अचूक) है, यह बात प्रसिद्ध है॥3॥

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Krishna Kutumb
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