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  • १०६ - हनुमान् जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस

    हनुमान् जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनाद का हनुमान् जी को नागपाश में बाँधकर सभा में ले जाना

    दोहा :
    * देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु।
    रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु॥17॥

    भावार्थ:-हनुमान्‌जी को बुद्धि और बल में निपुण देखकर जानकीजी ने कहा- जाओ। हे तात! श्री रघुनाथजी के चरणों को हृदय में धारण करके मीठे फल खाओ॥17॥

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Krishna Kutumb
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