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  • १०७ - हनुमान जी का बाग़ में घुसना

    चौपाई :
    * चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा॥
    रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे॥1॥

    भावार्थ:-वे सीताजी को सिर नवाकर चले और बाग में घुस गए। फल खाए और वृक्षों को तोड़ने लगे। वहाँ बहुत से योद्धा रखवाले थे। उनमें से कुछ को मार डाला और कुछ ने जाकर रावण से पुकार की-॥1॥

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Krishna Kutumb
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