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  • ११३ - मेघनाथ का क्रोध होना

    * चला इंद्रजित अतुलित जोधा। बंधु निधन सुनि उपजा क्रोधा॥
    कपि देखा दारुन भट आवा। कटकटाइ गर्जा अरु धावा॥2॥

    भावार्थ:-इंद्र को जीतने वाला अतुलनीय योद्धा मेघनाद चला। भाई का मारा जाना सुन उसे क्रोध हो आया। हनुमान्‌जी ने देखा कि अबकी भयानक योद्धा आया है। तब वे कटकटाकर गर्जे और दौड़े॥3॥

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