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  • ११५ - हनुमान जी का मेघनाथ के साथ युद्ध

    * तिन्हहि निपाति ताहि सन बाजा। भिरे जुगल मानहुँ गजराजा॥
    मुठिका मारि चढ़ा तरु जाई। ताहि एक छन मुरुछा आई॥4॥

    भावार्थ:-उन सबको मारकर फिर मेघनाद से लड़ने लगे। (लड़ते हुए वे ऐसे मालूम होते थे) मानो दो गजराज (श्रेष्ठ हाथी) भिड़ गए हों। हनुमान्‌जी उसे एक घूँसा मारकर वृक्ष पर जा चढ़े। उसको क्षणभर के लिए मूर्च्छा आ गई॥4॥

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Krishna Kutumb
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