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  • ११७ - मेघनाथ द्वारा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग

    दोहा :
    * ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
    जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥19॥

    भावार्थ:-अंत में उसने ब्रह्मास्त्र का संधान (प्रयोग) किया, तब हनुमान्‌जी ने मन में विचार किया कि यदि ब्रह्मास्त्र को नहीं मानता हूँ तो उसकी अपार महिमा मिट जाएगी॥19॥

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Krishna Kutumb
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