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  • १२२ - रावण का हनुमान जी को देखकर हँसना

    हनुमान् -रावण संवाद

    दोहा :
    * कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद।
    सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिसाद॥20॥

    भावार्थ:-हनुमान्‌जी को देखकर रावण दुर्वचन कहता हुआ खूब हँसा। फिर पुत्र वध का स्मरण किया तो उसके हृदय में विषाद उत्पन्न हो गया॥20॥

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Krishna Kutumb
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