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  • १२३ - हनुमान जी का रावण से संवाद

    चौपाई :
    * कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहि कें बल घालेहि बन खीसा॥
    की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही। देखउँ अति असंक सठ तोही॥1॥

    भावार्थ:-लंकापति रावण ने कहा- रे वानर! तू कौन है? किसके बल पर तूने वन को उजाड़कर नष्ट कर डाला? क्या तूने कभी मुझे (मेरा नाम और यश) कानों से नहीं सुना? रे शठ! मैं तुझे अत्यंत निःशंख देख रहा हूँ॥1॥

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Krishna Kutumb
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