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  • १२९ - हनुमान जी का रावण से संवाद

    चौपाई :
    * जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई॥
    समर बालि सन करि जसु पावा। सुनि कपि बचन बिहसि बिहरावा॥1॥

    भावार्थ:-मैं तुम्हारी प्रभुता को खूब जानता हूँ सहस्रबाहु से तुम्हारी लड़ाई हुई थी और बालि से युद्ध करके तुमने यश प्राप्त किया था। हनुमान्‌जी के (मार्मिक) वचन सुनकर रावण ने हँसकर बात टाल दी॥1॥

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