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  • १३३ - हनुमान जी का रावण से संवाद

    * जाकें डर अति काल डेराई। जो सुर असुर चराचर खाई॥
    तासों बयरु कबहुँ नहिं कीजै। मोरे कहें जानकी दीजै॥5॥

    भावार्थ:-जो देवता, राक्षस और समस्त चराचर को खा जाता है, वह काल भी जिनके डर से अत्यंत डरता है, उनसे कदापि वैर न करो और मेरे कहने से जानकीजी को दे दो॥5॥

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Krishna Kutumb
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