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  • १३६ - हनुमान जी का रावण से संवाद

    * राम नाम बिनु गिरा न सोहा। देखु बिचारि त्यागि मद मोहा॥
    बसन हीन नहिं सोह सुरारी। सब भूषन भूषित बर नारी॥2॥

    भावार्थ:-राम नाम के बिना वाणी शोभा नहीं पाती, मद-मोह को छोड़, विचारकर देखो। हे देवताओं के शत्रु! सब गहनों से सजी हुई सुंदरी स्त्री भी कपड़ों के बिना (नंगी) शोभा नहीं पाती॥2॥

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Krishna Kutumb
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