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  • १४४ - रावण का संवाद

    * सुनत बिहसि बोला दसकंधर। अंग भंग करि पठइअ बंदर॥5॥

    भावार्थ:-यह सुनते ही रावण हँसकर बोला- अच्छा तो, बंदर को अंग-भंग करके भेज (लौटा) दिया जाए॥5॥

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Krishna Kutumb
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