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  • १४५ - लंका दहन की शुरुवात

    लंकादहन
    दोहा :
    * कपि कें ममता पूँछ पर सबहि कहउँ समुझाइ।
    तेल बोरि पट बाँधि पुनि पावक देहु लगाइ॥24॥

    भावार्थ:-मैं सबको समझाकर कहता हूँ कि बंदर की ममता पूँछ पर होती है। अतः तेल में कपड़ा डुबोकर उसे इसकी पूँछ में बाँधकर फिर आग लगा दो॥24॥

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Krishna Kutumb
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