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  • १४६ - हनुमान जी के पूंछ में आग

    चौपाई :
    * पूँछहीन बानर तहँ जाइहि। तब सठ निज नाथहि लइ आइहि॥
    जिन्ह कै कीन्हिसि बहुत बड़ाई। देखउ मैं तिन्ह कै प्रभुताई॥1॥

    भावार्थ:-जब बिना पूँछ का यह बंदर वहाँ (अपने स्वामी के पास) जाएगा, तब यह मूर्ख अपने मालिक को साथ ले आएगा। जिनकी इसने बहुत बड़ाई की है, मैं जरा उनकी प्रभुता (सामर्थ्य) तो देखूँ!॥1॥

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Krishna Kutumb
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