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  • १५२ - हनुमान जी द्वारा लंका दहन

    चौपाई :
    * देह बिसाल परम हरुआई। मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई॥
    जरइ नगर भा लोग बिहाला। झपट लपट बहु कोटि कराला॥1॥

    भावार्थ:-देह बड़ी विशाल, परंतु बहुत ही हल्की (फुर्तीली) है। वे दौड़कर एक महल से दूसरे महल पर चढ़ जाते हैं। नगर जल रहा है लोग बेहाल हो गए हैं। आग की करोड़ों भयंकर लपटें झपट रही हैं॥1॥

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Krishna Kutumb
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