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  • १५६ - हनुमान जी का सीता जी से दोबारा मिलना

    लंका जलाने के बाद हनुमान् जी का सीताजी से विदा माँगना और चूड़ामणि पाना

    दोहा :
    * पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि।
    जनकसुता कें आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि॥26॥

    भावार्थ:-पूँछ बुझाकर, थकावट दूर करके और फिर छोटा सा रूप धारण कर हनुमान्‌जी श्री जानकीजी के सामने हाथ जोड़कर जा खड़े हुए॥26॥

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