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  • १६३ - हनुमान जी को देखकर सबका का खुश होना

    * हरषे सब बिलोकि हनुमाना। नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना॥
    मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा। कीन्हेसि रामचंद्र कर काजा॥2॥

    भावार्थ:-हनुमान्‌जी को देखकर सब हर्षित हो गए और तब वानरों ने अपना नया जन्म समझा। हनुमान्‌जी का मुख प्रसन्न है और शरीर में तेज विराजमान है, (जिससे उन्होंने समझ लिया कि) ये श्री रामचंद्रजी का कार्य कर आए हैं॥2॥

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