Loading...

  • १६७ -सुग्रीव के मन में विचार

    चौपाई :
    * जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि काई॥
    एहि बिधि मन बिचार कर राजा। आइ गए कपि सहित समाजा॥1॥

    भावार्थ:-यदि सीताजी की खबर न पाई होती तो क्या वे मधुवन के फल खा सकते थे? इस प्रकार राजा सुग्रीव मन में विचार कर ही रहे थे कि समाज सहित वानर आ गए॥1॥

    |0|0
Krishna Kutumb
ब्लॉग सूची 0 0 प्रवेश
Open In App