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  • १६९ - हनुमान जी और सुग्रीव की मुलाकात

    * नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना। राखे सकल कपिन्ह के प्राना॥
    सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ॥3॥

    भावार्थ:-हे नाथ! हनुमान ने सब कार्य किया और सब वानरों के प्राण बचा लिए। यह सुनकर सुग्रीवजी हनुमान्‌जी से फिर मिले और सब वानरों समेत श्री रघुनाथजी के पास चले॥3॥

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