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  • ७११ - श्री राम जी और वानरों का संवाद

    दोहा :
    * प्रीति सहित सब भेंटे रघुपति करुना पुंज॥
    पूछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज॥29॥

    भावार्थ:-दया की राशि श्री रघुनाथजी सबसे प्रेम सहित गले लगकर मिले और कुशल पूछी। (वानरों ने कहा-) हे नाथ! आपके चरण कमलों के दर्शन पाने से अब कुशल है॥29॥

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