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  • ३ ८ ३ - श्री राम जी के आँखों में आँशु

    चौपाई :
    * सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना॥
    बचन कायँ मन मम गति जाही। सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही॥1॥

    भावार्थ:-सीताजी का दुःख सुनकर सुख के धाम प्रभु के कमल नेत्रों में जल भर आया (और वे बोले-) मन, वचन और शरीर से जिसे मेरी ही गति (मेरा ही आश्रय) है, उसे क्या स्वप्न में भी विपत्ति हो सकती है?॥1॥

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Krishna Kutumb
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