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  • ५८ ५ - हनुमान जी और श्री राम जी का संवाद

    * सुनु कपि तोहि समान उपकारी। नहिं कोउ सुर नर मुनि तनुधारी॥
    प्रति उपकार करौं का तोरा। सनमुख होइ न सकत मन मोरा॥3॥

    भावार्थ:-(भगवान्‌ कहने लगे-) हे हनुमान्‌! सुन, तेरे समान मेरा उपकारी देवता, मनुष्य अथवा मुनि कोई भी शरीरधारी नहीं है। मैं तेरा प्रत्युपकार (बदले में उपकार) तो क्या करूँ, मेरा मन भी तेरे सामने नहीं हो सकता॥3॥

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Krishna Kutumb
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