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  • १ ८ ८ - हनुमान जी का प्रेम मग्न हो जाना

    चौपाई :
    * बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा॥
    प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा। सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा॥1॥

    भावार्थ:-प्रभु उनको बार-बार उठाना चाहते हैं, परंतु प्रेम में डूबे हुए हनुमान्‌जी को चरणों से उठना सुहाता नहीं। प्रभु का करकमल हनुमान्‌जी के सिर पर है। उस स्थिति का स्मरण करके शिवजी प्रेममग्न हो गए॥1॥

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Krishna Kutumb
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