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  • १ ८ ९ - हनुमान् जी को उठाकर प्रभु का हृदय से लगाना

    * सावधान मन करि पुनि संकर। लागे कहन कथा अति सुंदर॥
    कपि उठाई प्रभु हृदयँ लगावा। कर गहि परम निकट बैठावा॥2॥

    भावार्थ:-फिर मन को सावधान करके शंकरजी अत्यंत सुंदर कथा कहने लगे- हनुमान्‌जी को उठाकर प्रभु ने हृदय से लगाया और हाथ पकड़कर अत्यंत निकट बैठा लिया॥2॥

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Krishna Kutumb
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