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  • १९० - हनुमान जी और श्री राम जी का संवाद

    * कहु कपि रावन पालित लंका। केहि बिधि दहेउ दुर्ग अति बंका॥
    प्रभु प्रसन्न जाना हनुमाना। बोला बचन बिगत अभिमाना॥3॥

    भावार्थ:-हे हनुमान्‌! बताओ तो, रावण के द्वारा सुरक्षित लंका और उसके बड़े बाँके किले को तुमने किस तरह जलाया? हनुमान्‌जी ने प्रभु को प्रसन्न जाना और वे अभिमानरहित वचन बोले- ॥3॥

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