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  • १९२ - हनुमान जी और श्री राम जी का संवाद

    * सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई॥5॥

    भावार्थ:-यह सब तो हे श्री रघुनाथजी! आप ही का प्रताप है। हे नाथ! इसमें मेरी प्रभुता (बड़ाई) कुछ भी नहीं है॥5॥

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Krishna Kutumb
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